मुंबई के शुभजीत इस तरह कर रहे हैं मानसून में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, कोयंबटूर ने राज्य सरकार से प्रदेश के सभी भवनों में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाने का आग्रह किया है। अधिकतर दक्षिणी प्रदेशों में भूजल स्तर काफी नीचे गिर गया है और लगभग सभी जिलों में पानी की समस्या है। जहां चेन्नई पानी की कमी से जूझ रही है, वहीं मुंबई भारी बारिश का सामना कर रही है, जिससे मुंबई में रह रहे लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे मौसम की वजह भी ग्लोबल वार्मिंग ही है, जिसका पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में सामना कर रही है और वजह है लोगों की लापरवाही।

मिशन ग्रीन के संस्थापक सुभजीत मुखर्जी
इन दोनों शहरों के लिए सबसे बड़ी ज़रूरत स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता है। हालांकि, मुंबई जैसे शहर, जो मानसून के मौसम में वर्षा प्राप्त करते हैं, इस कमी को पूरा कर सकते है, लेकिन सुविधाओं और उचित संसाधनों की कमी के कारण शहर में पानी की एक बड़ी मात्रा बेकार चली जाती है। जबकि कई लोकल लोग और सरकारी एजेंसियां अब इस समस्या को हल करने के लिए एक व्यवहारिक समाधान की तलाश में हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं मुंबई में मिशन ग्रीन के संस्थापक सुभजीत मुखर्जी। शुभजीत ने बारिश के पानी को स्टोर करने का एक बेहतरीन समाधान निकाला है।
सुभजीत इस तरह एक सरल रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली का आविष्कार कर पानी को बचाने के लिए स्कूली और निजी तौर पर भूजल रिचार्जिंग में मदद कर रहे हैं।अपनी रेन वाटर हार्वेस्टिंग की तकनीक के बारे में बताते करते हुए वह कहते हैं, "आप एक ड्रम के चारों ओर कुछ छेद बना दें, एक 3 फीट गहरे गड्ढे में ड्रम को जमीन में स्थापित कर दें फिर छत्त के पानी को ड्रम से जोड़ दें। गड्ढे के आसपास के क्षेत्र को कंकड़ से भरा जा सकता है, जो फिल्टर के रूप में भी काम करता है और ऐसा करने से कीचड़ ड्रम में प्रवेश करने से रुक जाता है।”
सुभजीत के अनुसार, यह प्रक्रिया ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग में मदद कर सकती है। बाद में, पानी को टूबवेल, बोरवेलों के माध्यम से कहीं भी पहुँचाया जा सकता है और इससे आसपास के तालाबों को भी भरने में मदद मिलेगी। उन्होंने मुंबई शहर में अपनी पहल को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए इस बात को फैलाया कि वह इस सुविधा को स्थापित करने के लिए मुफ्त सेवा दे रहे हैं, जिसके बाद उन्हें बहुत सारे अनुरोध मिले, और इसलिए उन्होंने एक वीडियो साझा करने का फैसला किया कि यह सिस्टम कैसे स्थापित किया जाता है।
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सुभजीत से प्रेरित होकर, सिस्टम स्थापित करने वाले लोगों में एक मुंबई के मलाड के निवासी हैं जिन्होंने पिछले दस दिनों में छात्रों की मदद से छह स्कूलों में सिस्टम स्थापित किया है। उन्होंने जो प्रभाव पैदा किया, उसके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “औसतन, एक स्कूल को हर महीने साफ़ सफाई करने के लिए कम से कम 5,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए यदि आप मानसून के मौसम में उस 5,000 लीटर पानी को बचा सकते हैं, तो चार महीने तक आपने आसानी से 20,000 लीटर पानी बचाया है।”
सबसे दिलचस्प बात ये है कि जो लोग प्लास्टिक ड्रम का उपयोग नहीं करना चाहते हैं वे ईंट और कंकड़ से गड्ढे भर सकते हैं। पानी कंकड़ के बीच की जगह से होकर जमीन तक पहुंच सकता है। पानी की मात्रा कम होने के बावजूद इस प्रक्रिया से 50 प्रतिशत तक पानी बचाया सकता है। सुभजीत द्वारा बनाया गया यह सिस्टम लोगों को बहुत प्रभावित कर रहा है। यह तकनीक और भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है अगर हम सब मानसून में इस सिस्टम को अपने घरों में स्थापित करें और पानी को ज़्यादा से ज़्यादा बचा कर पानी की किल्लत से निजात पाएं।
(निधि भंडारी)