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ब्रिटेन के 'द डायना अवार्ड' से नवाज़ी गईं पंजाब की प्रतिष्ठा देवेश्वर, भारत की पहली व्हीलचेयर यूजर गर्ल को बीते साल मिला था ऑक्सफोर्ड में एडमिशन

वर्तमान में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी की पढ़ाई कर रही प्रतिष्ठा के भारत की पहली व्हीलचेयर यूजर बनकर इतिहास रचने और अब ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाज़े जाने की यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।

"डायना पुरस्कार से पहले प्रतिष्ठा को दिल्ली की राष्ट्रीय स्तर की यूनिवर्सिटी द्वारा भी 2020 में नेशनल रोल मॉडल के तौर पर सम्मानित किया गया था। प्रतिष्ठा 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की ब्रांड एंबेसेडर भी हैं। प्रतिष्ठा ने अपनी 12 वीं कक्षा तक की पढ़ाई होशियारपुर से की और बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।"

पंजाब के होशियारपुर की प्रतिष्ठा देवेश्वर को हाल ही में ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना पुरस्कार (The Diana Award) से सम्मानित किया गया है। प्रतिष्ठा भारत की पहली व्हीलचेयर यूजर गर्ल हैं जिन्हें बीते साल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) में एडमिशन मिला था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिष्ठा देवेश्वर को तेरह साल की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में सीने से नीचले हिस्से तक लकवा मार गया था।


लेकिन तब भी प्रतिष्ठा ने हार नहीं मानी और शिक्षा के जरिए हर बाधा को दूर करना अपने जीवन का मिशन बना लिया। वह बारहवीं कक्षा तक घर पर ही पढ़ती रही और स्नातक होने के बाद, उन्होंने आगे की पढ़ाई घर से बाहर, कॉलेज जाकर, करने की इच्छा जताते हुए अपने माता-पिता से बात की, जो उन्हें दिल्ली स्थित लेडी श्रीराम कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए सहमत हो गए। हालांकि, उनके रिश्तेदारों ने उनके माता-पिता को सलाह दी कि वह प्रतिष्ठा को दिल्ली न भेजें।


डायना पुरस्कार से पहले प्रतिष्ठा को दिल्ली की राष्ट्रीय स्तर की यूनिवर्सिटी द्वारा भी 2020 में नेशनल रोल मॉडल के तौर पर सम्मानित किया गया था। प्रतिष्ठा 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की ब्रांड एंबेसेडर भी हैं। प्रतिष्ठा ने अपनी 12 वीं कक्षा तक की पढ़ाई होशियारपुर से की और बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।


बीते साल जब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रतिष्ठा को एडमिशन मिला था, तब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं थी।

प्रतिष्ठा भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण के प्रमुख अभियान के लिए क्षेत्रीय राजदूत हैं। वह समावेशी नीति निर्माण, अल्पसंख्यक अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा को लेकर कुछ करना चाहती हैं। वह दुनिया को अपनी कहानी बताने के लिए जीती है और समाज की सेवा के लिए अपनी जीवन यात्रा का उपयोग करना चाहती है- अपने अनुभवों और साथ आने वाले दृष्टिकोणों को साझा करके लाखों लोगों को प्रेरित करने के लिए।


आपको बता दें कि डायना पुरस्कार को ब्रिटेन का "सर्वोच्च सम्मान" माना जाता है जो एक युवा व्यक्ति (9-25 वर्ष के बीच की आयु) सामाजिक कार्यों या मानवीय प्रयासों के लिए प्राप्त कर सकता है। यह पुरस्कार वेल्स की राजकुमारी डायना की याद में शुरू किया गया था, और उन्हीं के नाम पर उनके बेटों, विलियम, ड्यूक ऑफ कैम्ब्रिज (Duke of Cambridge) और हैरी, द ड्यूक ऑफ ससेक्स (The Duke of Sussex) द्वारा समर्थित है।


इस वर्ष डायना पुरस्कार का आयोजन वर्चुअल किया गया। इस पुरस्कार समारोह में प्रिंस हैरी, ड्यूक ऑफ ससेक्स सहित कई प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया, जिन्होंने द डायना अवार्ड 2021 प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी।


प्रतिष्ठा ने अपने एक ट्वीट में आभार जताते हुए लिखा, "राजकुमारी डायना के नाम के करीब कहीं भी होना अपने आप में एक सम्मान है! मैं जो जीवन जीती हूं उसके लिए आभारी हूं!"

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, "इस महीने की शुरुआत में, मुझे HRH प्रिंस चार्ल्स से मिलने का अविश्वसनीय सम्मान मिला, जिन्होंने मेरी अब तक की उपलब्धियों की सराहना की और मुझे सफलता के लिए प्रयास करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया! मैं डायना पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आभारी हूं और मेरी यात्रा का समर्थन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को धन्यवाद देती हूं!"

वर्तमान में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी की पढ़ाई कर रही प्रतिष्ठा के भारत की पहली व्हीलचेयर यूजर बनकर इतिहास रचने और अब ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाज़े जाने की यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।


Edited by Ranjana Tripathi