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राजस्थान: किसान ने 23 मोरों को जहर देकर उतारा मौत के घाट, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप

राजस्थान: किसान ने 23 मोरों को जहर देकर उतारा मौत के घाट, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप

Wednesday December 25, 2019 , 2 min Read

किसान ने 23 मोरों को जहर देकर उतारा मौत के घाट। फसल की क्षति को रोकने के लिए दिया जहर। घटना राजस्थान के बीकानेर जिले के सेरूना गाँव की। पुलिस की गिरफ्त में आरोपी किसान दिनेश कुमार।


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प्रतीकात्मक चित्र



राजस्थान के बीकानेर जिले के सेरूना गाँव में एक किसान ने खेतों में फसल की क्षति को रोकने के लिए जहर देकर 23 मोरों को मौत के घाट उतार दिया। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी किसान को गिरफ्तार कर लिया है। किसान का नाम दिनेश कुमार बताया जा रहा है।


वन विभाग के सहायक वन संरक्षक का कहना है,

"23 मोरों के शव बरामद किए गए। किसान दिनेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।"


समाचार एजेंसी ANI ने घटना की ट्वीट के जरिए घटना की जानकारी दी।

ANI ने अपने ट्वीट में लिखा-


राजस्थान: बीकानेर के सेरूना गाँव में एक किसान द्वारा फसल की क्षति को रोकने के लिए कथित तौर पर जहर देने के बाद 23 मोर मृत हो गए। वन विभाग के सहायक वन संरक्षक का कहना है, "23 मोरों के शव बरामद किए गए। किसान दिनेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।"


उल्लेखनीय है कि अगस्त 2018 में मदुरै जिले के मदुरंतकम में एक झील के पास संदिग्ध रूप से जहर खाने से करीब 47 मोरों की मौत हुई थी। 




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फोटो क्रेडिट: deccanherald

आपको बता दें कि जून 2013 में संदिग्ध जहरीले अनाज खाने के बाद राजस्थान में दो अलग-अलग स्थानों पर 23 मोर मृत पाए गए थे। टोंक जिले के नगरफोर्ट इलाके में कुल 17 मोर (5 नर और 12 मादा) के शव मिले थे, जबकि नागौर जिले के मकराना शहर के बरवाला गांव के वन क्षेत्र में छह मोर मृत पाए गए थे।


आपको बता दें कि मई 2017 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में ऐसी ही वारदात को अंजाम दिया गया था। जहां कपसेठी गांव में मंदाकिनी नदी के तट पर मोरों को घुमंतू जाति के युवकों ने मक्के के दाने में जहर मिलाकर खिला दिया था। जिससे छह मोरों की मौत हो गई थी।


गौरतलब हो कि भारतीय वन संरक्षण अधिनियम के अनुसार शिकार करना या उसे मारना या शिकार करना एक दंडनीय अपराध है। वर्ष 1972 के भारतीय वन अधिनियम के अनुसार राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार करने या उसकी हत्या करने पर 5 वर्ष के कारावास की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।