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ये हैं देश के सबसे गरीब भाजपा सांसद सारंगी और सरस्वती

सियासत में फकीरी भी बड़े काम की चीज साबित हो चुकी है। इस बार सत्रहवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित तमाम अरबपति-करोड़पति सांसदों के बीच दो सबसे गरीब जनप्रतिनिधि पहुंचे हैं, ओडिशा से प्रतापचंद्र सारंगी और राजस्थान से स्वामी सुमेधानंद सरस्वती।


सोलवीं लोकसभा में 15 सांसद अरबपति और 442 सांसद करोड़पति थे। इस बार सत्रहवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित 233 सांसदों पर जहां आपराधिक मामले दर्ज हैं, वही कांग्रेस के तीन सांसद अरबपति और कुल 475 सांसद (88 प्रतिशत) करोड़पति हैं लेकिन इन्ही के बीच भाजपा के दो सांसद ऐसे भी चुनकर लोकसभा पहुंचे हैं, जो सबसे गरीब हैं। उनमें एक हैं- मोदी कैबिनेट में मंत्री बने 64 वर्षीय प्रताप चंद्र सारंगी और दूसरे हैं, सीकर (राजस्थान) के सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती।

pratap sarangi

प्रताप चंद्र सारंगी औऱ सुमेधानंद सरस्वती

अपनी फकीराना जिंदगी के लिए मशहूर बालासोर क्षेत्र से निर्वाचित सारंगी को तो लोग 'ओडिशा का मोदी' कहते हैं। अपनी सादगी के लिए विख्यात सारंगी मोदी कैबिनेट के सबसे गरीब मंत्री हैं। एक वक़्त में वह साधु बनकर एकांत जीवन बिताना चाहते थे लेकिन सामाजिक सरोकारों ने उन्हे सियासत के लिए विवश कर दिया। उनका ज्यादातर सफर साइकिल पर बीतता रहा है। उन्होंने अपना चुनाव प्रचार किराए के एक ऑटो रिक्शा से किया। राष्ट्रपति भवन में जिस समय सारंगी शपथ ले रहे थे, तालियों से गूंजते परिसर में पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी तालियों से उनका हौसलाफजाई करते रहे।


लंबे समय से सारंगी की सामाजिक कार्यनिष्ठा स्वयं सेवक संघ के साथ रही है। इस बार लोकसभा चुनाव में बीजद प्रत्याशी रबींद्र कुमार जेना को 12,956 मतों से पराजित करने वाले सारंगी दो बार ओडिशा विधानसभा के लिए भी चुने जा चुके हैं। प्रतापचंद्र सारंगी के पास न अपना मकान है, न अपना परिवार- फूस का छप्पर, आने-जाने के लिए एक अदद साइकिल। अपनी पेंशन राशि तक को वह गरीब बच्चों पर न्योछावर कर देते हैं।


मंत्री बनने के बाद पीएम मोदी का आभार जताते हुए सारंगी कहते हैं कि 'आम आदमी और पीएम मोदी का विश्वास जीतने के लिए वह अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे। वह सौभाग्यशाली हैं कि पीएम मोदी ने उन पर अपना भरोसा जताया है। वह राजनीति को राष्ट्र सेवा का माध्यम मानते हैं। उनकी पार्टी के लिए राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे नंबर पर और वह स्वयं अंतिम हैं। वह मोदी जी और आम लोगों का विश्वास जीतने की पूरी कोशिश करेंगे।' यद्यपि, नेशनल इलेक्शन वॉच और एडीआर (एसोसिएशन फॉर ड्रेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) के मुताबिक, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री बने सारंगी के खिलाफ, धार्मिक भावनाएं भड़काने, वैमनस्य पैदा करने आदि के कुल सात आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।




राजनीति में कदम रखते ही आलिशान बंगला, लग्जरी गाड़ियों से अपनी नई पहचान वाले नेताओं की कतार में राजस्थान के सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती की अपनी अलग दास्तान है। सारंगी की तरह वह भी देश के सबसे गरीब सांसद हैं। वह लगातार दूसरी बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। एसोसिएशन ऑफ डिमॉक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) के मुताबिक, सरस्वती की कुल सम्पति 34 हजार 311 रुपए है। वह बताते हैं कि अपने पिछले कार्यकाल के पांच वर्षों में एक भी रुपया नहीं कमाया है।


उन्होंने सरकार से मिला सारा पैसा जनता के विकास कार्यों में झोक दिया। सरस्वती मूलतः रोहतक (हरियाणा) के गांव बालंद के रहने वाले हैं। जब वह उन्नीस साल के थे, घर छोड़कर गुरुकुलों में संस्कृत और वैदिक शास्त्रों का अध्ययन करने निकल पड़े। उन दिनो वह गुरुकुल आर्य नगर, हिसार (हरियाणा), दीनानगर, हरिद्वार आदि में रहे। दस साल श्रीगंगानगर (राजस्थान) में बिताया। वर्ष 1996 से वह पिपराली, सीकर (राजस्थान) के वैदिक आश्रम से गौ संरक्षण और शिक्षा संस्कार अभियान चला रहे हैं।